Gods Dancing Among Men

Theyyam, an ancient tradition of North Malabar, is a captivating blend of folk art, religious ritual, and profound spirituality. Gods Dancing Among Men: The Mystical World of Theyyams of North Malabar delves deep into the rich history of theyyam, exploring its roots and relevance in contemporary belief and worship. This book sheds light on both the luminous and shadowy facets of this tradition as well as the enigmatic grey areas that define it.

 

Every aspect of the theyyam cult, from the vibrant and intricate costumes to the wild and transcendent dances, is fascinating. The practitioners of theyyam display astonishing abilities, including clairvoyance, prophecy, and the power to fulfil wishes. The pantheon of theyyam includes Shaivite and Vaishnavite manifestations alongside a diverse array of Bhagvathy theyyams. Popular deities such as Muthappan, Muchilot Bhagavathi, Thee Chamundi, Gulikan, Kuttichathan, and Pottan Deiyvam hold a special place in the hearts of the people. Additionally, the theyyam tradition incorporates animals into its repertoire with performances featuring monkeys, tigers, buffaloes, crocodiles, bees, and snakes. One of the most astonishing aspects of theyyam is the fearless interaction with fire. Performers nonchalantly walk on embers and even hurl themselves onto immense mounds of fire, known as meleri, repeatedly. Despite the influence of Aryanization, the sanitizing impact of British colonial rule, the teachings of social reformers, the remarkable literacy rates, and the prevalent communist ideology in the region, the sanctity of the theyyam tradition remains unblemished. Theyyams are living gods, cherished and revered by the people of North Malabar, and their blessings hold immense significance.

Modi’s Governance Triumph

Meticulously research and analysed, Modi’s Governance Triumph: Reshaping India’s Path to Prosperity delves into the Modi government’s key initiatives, reforms and innovations that have left an indelible imprint on India’s socioeconomic and political fabric. From the ambitious ‘Make in India’ campaign to sweeping changes in the taxation system with the introduction of the goods and services tax (GST), each chapter unpacks the narrative of a leader who has redefined governance in the world’s largest democracy.

 

The book not only examines the achievements but also critically evaluates the challenges and controversies that have marked Modi’s tenure, providing a wellrounded perspective on his leadership. It is an essential read for anyone interested in understanding changes taking place in India and the role Prime Minister Narendra Modi plays in reshaping the nation’s future.

Modian Consensus

Modian Consensus: The Rediscovery Of Bharat maps the Indian political trajectory of the last 150 years. It locates various periods of consensus that developed in Bharat from time to time and drove the policy, planning and politics of the day. Four of these consensus phases of the past have been identified as Civilisational Consensus, Gandhian Consensus, Nehruvian Consensus and Secular Consensus. The fifth and ongoing phase, the book argues, is Modian Consensus. The book examines how the politics of the day finds itself willy-nilly amidst a consensus around the politics of Narendra Modi. In the current phase, parties and politicians diametrically opposed to Modi’s ideas are compelled to follow the line of policies and programmes set by him. The impact of this consensus can be observed far beyond the domain of politics as it stands on the three postulates of cultural rootedness, assertive nationalism and welfare for all. The book explores various manifestations of Modian Consensus, including the challenges it faces and what it augurs for the future of Indian politics.

मोदी का बनारस

मोदी का बनारस -यह सिर्फ़ पुस्तक नहीं यात्रा है। गंगा यहाँ की जीवनरेखा है। गंगा, बाबा विश्वनाथ के बिना इस नगरी की कल्पना अधूरी है। नरेन्द्र मोदी का बनारस से चुनाव लड़ना राजनीति की असाधारण घटना है। बनारस का सामर्थ्य, कर्तव्य को पूरी दुनिया ने देखा है। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो कुछ भी असंभव नहीं है। नरेन्द्र मोदी ने बनारस में अपने तप से चुनाव तो जीता ही, साथ ही बनारस में अपने ख़िलाफ़ की जाने वाले दूसरी पार्टी नेताओं की साज़िशो को भी विफल कर दिया। देखते ही देखते मोदी ने अपने जीत का परचम बिहार, झारखंड, बंगाल तक फहरा दिया। मोदी की जीत एवं बनारस को लेकर लिए गए फ़ैसलों की कहानी है यह पुस्तक, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। यह पुस्तक आपको यह भी बताएगी कि बनारस से जीत की पटकथा कैसे लिखी गई, उसकी रूपरेखा किसने तैयार की थी। अमित शाह ने वर्ष 2010 में बनारस में क्या संकल्प लिया था। जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने ना दिन देखा ना रात। यूपी और बनारस का चुनाव जीतने के लिए अमित शाह ने राजनाथ सिंह से ऐसा क्या वचन लिया था, जिसे लेकर सबके बीच में उन्होंने कह दिया कि मैं होता तो यह वचन कभी नहीं देता। नरेंद्र मोदी ने कोविड काल के समय को ही बाबा विश्वनाथ मंदिर के कायाकल्प के लिए क्यों चुना। क्या आप को पता है कि बाबा विश्वनाथ मंदिर के लिए जमीन एकत्र करने के क्रम में जमीनों की सभी रजिस्ट्री एक विशेष समय में की गई थी। आखिर क्यों? क्या आप यह जानते हैं कि बनारस के विश्वनाथ मंदिर में कितना सोना लगा है? एक आश्रम का तिलिस्म जिसकी जमीन को खाली करवाने में एक साल लग गया। आखिर कैसे खाली हुई वह जमीन। कैसे पीएम मोदी ने आर्किटेक्ट के पहले बने नक्शे को खारिज कर दिया था। क्योटो में ऐसा क्या है जो उसे बनारस से जोड़ देता है। मोदी ने जापान के शहर क्योटो को ही क्यों चुना? बनारस का ऐसा घाट जहां पर आप हेलीकॉप्टर से पहुंच सकते हैं। फ़्रांस के राष्ट्रपति ने बनारस में ऐसा क्या पूछ लिया, जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा होने लगी। इन सब सवालों और जिज्ञासाओं का उत्तर आप को इस पुस्तक मोदी के बनारस में ही मिलेगा।

हिन्दू राष्ट्र: हिन्दुओं की रामकहानी

जो यह दावा करते हैं कि हम एक अधिनायकवादी हिंदू राष्ट्र में रह रहे हैं उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि यह किस प्रकार का हिंदू राष्ट्र है जहां एक अरब शक्तिशाली हिंदू यहाँ की संसद, अदालतों, शिक्षा व्यवस्था और हमारे संविधान द्वारा न सिर्फ दोयम दर्जे के नागरिक करार दिए गए हैं बल्कि उससे भी नीचे धकेल दिए गए? यह कैसा हिंदू राष्ट्र है जिसमें दुर्गा पूजा और गरबा के आयोजनों पर बेरोकटोक पत्थरबाजी की जाती है और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा एक शख्स कहता है कि इस देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है? यह कैसा हिंदू राष्ट्र है जहाँ हिंदुओं को अपनी ही धरती पर शरणार्थियों की तरह रहना पड़ता है और जहाँ कोई 40 हजार रोहिंग्या मुसलमानों को तो बसा सकता है लेकिन इसी देश के धरतीपुत्र 7 लाख कश्मीरी पंडितों को नहीं और जहाँ अदालतों का कहना हैं कि हिंदुओं की हत्या, बलात्कार और जातीय संहार करने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है? यह किस तरह का हिंदू राष्ट्र है जहाँ हिंदुओं के मंदिर सरकारों के कब्जे में हैं और अपने त्यौहार मनाने के लिए हिंदुओं को वक्फ बोर्ड के सामने जमीन के लिए हाथ फैलाने पड़ते हैं? यह किस तरह का हिंदू राष्ट्र है जहाँ शिक्षा का अधिकार अधिनियम में केवल हिंदुओं के स्कूलों के साथ भेदभाव किया जाता है और उन्हें ताला लगाने को मजबूर कर दिया जाता है? यह किस तरह का हिंदू राष्ट्र है जहां औरंगज़ेब और टीपू जैसे बर्बर शासकों को लेकर सरकारी खर्चे पर प्रकाशन किए जाते हैं, सड़कों के नाम रखे जाते हैं और त्योहारों का आयोजन होता है? यह किस तरह का हिंदू राष्ट्र है जहाँ एक ऐसा कानून बिल्कुल बन ही जाने ही वाला था जिसमें केवल हिंदुओं को, जबकि वे अल्पसंख्यक थे, सांप्रदायिक दंगों के लिए दोषी ठहराया जाता जैसा कि कश्मीर में देखा गया? यह किस तरह का हिंदू राष्ट्र है जहाँ सबरीमाला प्रकरण में अदालतों के फैसले और विधायी कानून केवल हिंदुओं के धर्माचारों में सुधार के लिए किए जाएँ लेकिन दूसरे धर्म को छुआ तक न जाए और अगर ऐसा कोई करे भी, तो वहाँ शाहबानो के मामले की तरह फैसले को पलट दिया जाए? यह किस तरह का हिंदू राष्ट्र है जहाँ हिंदू पूजा स्थल अधिनियम आज भी हिंदुओं को उनके प्रति हुए ऐतिहासिक अन्यायों को दुरुस्त करने के उनके विधिसम्मत अधिकार पर रोक लगता है जबकि वक्फ एक्ट मुसलमानों को एक 1500 वर्ष पुराने हिंदू मंदिर को इस्लामी संपदा घोषित करने की अनियंत्रित शक्ति दे देता है, गो कि इस्लाम अपने आप में महज 1300 वर्ष पुराना है? अगर एक हिंदू राष्ट्र में हिंदू को इस तरह नवाजा जा रहा हो तो इससे अच्छा है कि वह एक मुस्लिम राष्ट्र में रहे क्योंकि वहाँ कम से कम बराबरी का ढोंग तो नहीं होगा, एक काफिर को वही मिलेगा जो उसे मिलना चाहिए। अपनी इस कड़वे बयान में आनंद रंगनाथन आजादी के बाद से हिंदुओं के साथ धोखेबाज़ी करने वाली ग्लानि भरी झूठी कहानी और आत्मदोषानुभूति पर एक निर्णायक प्रहार करते हुए उसे चकनाचूर कर देते हैं। यहाँ कोई स्वांग या राजनीतिक शुचिता नहीं है, अगर है तो केवल राज्य प्रायोजित नस्ल भेद की वह ठोस सच्चाई जिसके साथ हिंदू जी रहे हैं।